राहुल गांधी की फोन-कॉल रणनीति ने अल्मोड़ा रैली में उमड़े जनसैलाब में नया जोश भरा
कांग्रेस ने मैदान छोड़ पहाड़ की मूल जनता के पलायन और रोजगार मुद्दों को चुना
भाजपा ‘धामी मॉडल’ और समान नागरिक संहिता के दम पर हैट्रिक के लिए आश्वस्त
दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने मोर्चा संभालकर भाजपा के मैदानी दबदबे को सीधी चुनौती दी
-अमरनाथ सिंह, देहरादून।
उत्तराखंड की सियासत में ‘पहाड़’ और ‘मैदान’ का संतुलन हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की चुनावी हैट्रिक रोकने के लिए कांग्रेस ने इस बार अपनी रणनीति में बड़ा और आक्रामक बदलाव किया है। जहां भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों ने हालिया दौरों में अपनी गतिविधियों को मुख्य रूप से मैदानी इलाकों यानी देहरादून और हरिद्वार तक सीमित रखा, वहीं कांग्रेस ने इसके उलट सीधे पहाड़ों से अपने अभियान का शंखनाद करने का फैसला किया। इस रणनीति के तहत अल्मोड़ा के सिमकाली मैदान से चुनावी बिगुल फूंका गया। हालांकि, मौसम की खराबी के कारण लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका और उन्हें पंतनगर हवाई अड्डे से ही वापस लौटना पड़ा, लेकिन कांग्रेस ने इस चुनौती को एक नए सियासी अवसर में बदल दिया।
राहुल गांधी भले ही शारीरिक रूप से रैली में नहीं पहुंच सके, लेकिन उन्होंने पंतनगर से ही फोन कॉल और वीडियो संदेश के जरिए अल्मोड़ा में उमड़े जनसैलाब को संबोधित किया। उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य जैसे दिग्गजों ने बहुत ही सूझबूझ से मंच संभाला और राहुल गांधी की बात को जनता तक पहुंचाया। राहुल गांधी ने फोन पर कार्यकर्ताओं से माफी मांगते हुए जल्द ही उत्तराखंड आने का वादा किया और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड को दिल्ली से ‘रिमोट कंट्रोल’ द्वारा चलाया जा रहा है, जिससे यहां के स्थानीय संसाधनों का लाभ मूल निवासियों को नहीं मिल पा रहा है।
यह रणनीतिक बदलाव इसलिए बेहद अहम है क्योंकि हाल ही में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे के दौरान देहरादून और हरिद्वार के मैदानी बेल्ट में ही अपनी ताकत झोंकी थी। भाजपा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे, ‘धामी मॉडल’ और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को आगे रखकर तीसरी बार सरकार बनाने के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है। मैदानी सीटों पर वोट बैंक का घनत्व अधिक होने के कारण भाजपा की रैलियां और सांगठनिक बैठकें ज्यादातर इन्हीं बड़े केंद्रों पर केंद्रित रही हैं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस का मानना है कि उत्तराखंड की असली और मूल जनता पहाड़ों में निवास करती है, जहां आज भी पलायन, रोजगार, अग्निवीर योजना और बुनियादी सुविधाएं सबसे बड़े जमीनी मुद्दे हैं। अल्मोड़ा रैली स्थल पर उमड़ी भारी भीड़ और राहुल गांधी के वर्चुअल संबोधन को मिला जनसमर्थन साफ संदेश दे रहा है कि पहाड़ की जनता बदलाव के मूड में है। भले ही राहुल गांधी का यह दौरा जमीनी रूप से अधूरा रहा, लेकिन फोन कॉल के जरिए उठी इस गूंज ने भाजपा खेमे में हलचल जरूर बढ़ा दी है। कांग्रेस की यह ‘पहाड़ नीति’ भाजपा के मजबूत सांगठनिक ढांचे के सामने कितनी कारगर होगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि सत्ता की तीसरी पारी भाजपा के लिए उतनी आसान नहीं रहने वाली।