सभी वरिष्ठ नेताओं में आपसी समन्वय बनाकर सामूहिक नेतृत्व को देना होगा बढ़ावा
मुख्य रणनीतिकार की भूमिका में हरीश रावत और हरक, प्रीतम और आर्य को दी जाए जोन-वार जिम्मेदारी
गणेश गोदियाल जैसे ऊर्जावान नेताओं को चुनाव अभियान की मुख्य कमान देने की जरूरत
-ममता सिंह, देहरादून।
उत्तराखंड की राजनीतिक तासीर भले ही हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की रही हो, लेकिन कांग्रेस के लिए सत्ता तक पहुंचने की राह तब तक आसान नहीं होगी, जब तक वह अपनी सबसे बड़ी कमजोरी—आंतरिक गुटबाजी—का ठोस समाधान नहीं खोज लेती। राज्य में पार्टी के पुनर्जीवन के लिए केवल भाजपा विरोधी माहौल पर निर्भर रहना आत्मघाती साबित हो सकता है। कांग्रेस को सामूहिक नेतृत्व (कलेक्टिव लीडरशिप) के ऐसे व्यावहारिक और आक्रामक मॉडल पर काम करना होगा, जिसमें सभी बड़े नेताओं के राजनीतिक कद और प्रभाव का संतुलित उपयोग हो सके। इसके लिए पार्टी को अनुभव और आक्रामकता के संतुलन वाली नई संगठनात्मक रणनीति तैयार करनी होगी।
इस रणनीति में पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है। भले ही वे उम्र और चुनावी समीकरणों के कारण स्वयं चुनाव न लड़ें, लेकिन राज्य की लगभग हर विधानसभा सीट की राजनीतिक नब्ज से परिचित रावत को मुख्य रणनीतिकार और मार्गदर्शक की भूमिका में रखा जाना चाहिए। उनके अनुभव, जनसंपर्क और चुनावी प्रबंधन की क्षमता का लाभ टिकट वितरण से लेकर घोषणापत्र निर्माण तक उठाया जा सकता है।
वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं—Yashpal Arya, Harak Singh Rawat और Pritam Singh—को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां सौंपी जानी चाहिए। कुमाऊं के दलित और ओबीसी बहुल इलाकों में यशपाल आर्य के प्रभाव का लाभ लिया जा सकता है, जबकि गढ़वाल और मैदानी क्षेत्रों में प्रीतम सिंह तथा हरक सिंह रावत की संगठनात्मक पकड़ और आक्रामक राजनीतिक शैली को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे गुटबाजी पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।
पार्टी के भीतर युवा और संघर्षशील चेहरों को आगे बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है। पिछले चुनावों में धन सिंह रावत को कड़ी चुनौती देने वाले और लोकसभा चुनाव में अनिल बलूनी के मुकाबले मजबूती से चुनाव लड़ने वाले Ganesh Godiyal को कांग्रेस अपना प्रमुख आक्रामक चेहरा बना सकती है। उनकी बेबाक शैली, स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ और जनता के बीच सक्रिय छवि को देखते हुए उन्हें चुनाव अभियान समिति की कमान या अग्रिम पंक्ति के स्टार प्रचारक के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। इससे युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।
केंद्रीय स्तर पर भी कांग्रेस को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। उत्तराखंड के पहाड़ी और पारंपरिक समाज में Rahul Gandhi की तुलना में Priyanka Gandhi Vadra की सौम्य, आत्मीय और जनसरोकारों से जुड़ी छवि अधिक प्रभावशाली दिखाई देती है। ऐसे में प्रियंका गांधी को उत्तराखंड अभियान का प्रमुख राष्ट्रीय चेहरा बनाकर महिला और युवा मतदाताओं तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचा जा सकता है।
अंततः टिकट वितरण के स्तर पर राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व को किसी भी प्रकार की गुटबाजी या ‘कोटा सिस्टम’ को पूरी तरह खारिज करना होगा। उम्मीदवार चयन का आधार केवल निष्पक्ष आंतरिक सर्वेक्षण, स्थानीय लोकप्रियता, संगठनात्मक सक्रियता और स्वच्छ छवि होना चाहिए। कांग्रेस को यह समझना होगा कि उत्तराखंड की जनता एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प चाहती है। यह विकल्प तभी उभरकर सामने आएगा, जब पार्टी स्वयं को एकजुट, अनुशासित और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार राजनीतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करेगी।