भारत और इटली की बढ़ती नजदीकियां अब सिर्फ सोशल मीडिया के ‘मेलोडी’ मीम्स तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति काम कर रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया इटली दौरे ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, इटली ने पहले ही चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से खुद को अलग कर बड़ा संकेत दे दिया था। अब इटली एशिया में भारत को अपना सबसे भरोसेमंद साझेदार मानकर आगे बढ़ रहा है।
इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने सत्ता संभालने के बाद चीन की आर्थिक रणनीतियों से दूरी बनाई और भारत के साथ नए रिश्तों की नींव मजबूत की। दोनों नेताओं की केमिस्ट्री को सोशल मीडिया पर भले ही हल्के अंदाज में पेश किया गया हो, लेकिन इसके पीछे गहरी रणनीतिक साझेदारी छिपी हुई है।
वैश्विक व्यापार के नजरिए से इटली भारत के लिए बेहद अहम बन गया है। यूरोप तक भारतीय व्यापार पहुंचाने में भूमध्य सागर और इटली के बंदरगाह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के जरिए भारत और इटली आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने में जुट गए हैं। इसे चीन की वैश्विक व्यापारिक पकड़ को चुनौती देने वाली बड़ी पहल माना जा रहा है।
सिर्फ व्यापार ही नहीं, रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं। अब इटली भारत में ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत एडवांस रडार सिस्टम और मैरीटाइम डिफेंस उपकरणों के सह-उत्पादन पर काम करेगा। इससे भारत की रक्षा क्षमता मजबूत होगी और यूरोप में उसकी रणनीतिक पकड़ भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और इटली की यह साझेदारी चीन के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। यही वजह है कि ‘मेलोडी’ की मुस्कुराहटों के पीछे छिपा यह गठबंधन अब वैश्विक राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।