दुनिया में लगातार बढ़ रहे ग्लोबल वॉर्मिंग के खतरे के बीच वैज्ञानिकों ने बड़ी चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2026 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और संभावित अल नीनो की स्थिति दुनिया भर में मौसम के गंभीर बदलाव ला सकती है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लयूएमओ) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया कि प्रशांत महासागर के भूमध्य रेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह तेजी से गर्म हो रही है। इसके चलते मई से जुलाई के बीच अल नीनो बनने की संभावना काफी बढ़ गई है। हालांकि वैज्ञानिक अभी इसके प्रभाव की तीव्रता का सटीक अनुमान लगाने में जुटे हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो बनने पर दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है। अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, दक्षिण अमेरिका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में भारी बारिश और अधिक नमी देखने को मिल सकती है। वहीं ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में गंभीर सूखे की आशंका जताई गई है।
यूरोपीय यूनियन की Copernicus Climate Change Service ने भी अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर के कुछ हिस्सों में समुद्र के असामान्य रूप से गर्म होने की जानकारी दी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके कारण यूरोप में इस बार भीषण गर्मी और लू का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम संबंधी आपदाएं पहले से अधिक तेज और खतरनाक हो सकती हैं। ऐसे में शुरुआती चेतावनी प्रणाली बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। World Meteorological Organization और संयुक्त राष्ट्र मिलकर आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं।
इस बीच चीन ने एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और रिमोट सेंसिंग तकनीक के जरिए बाढ़, तूफान और भूस्खलन जैसी आपदाओं की निगरानी तेज कर दी है। वहां आपातकालीन अभ्यास भी बढ़ाए गए हैं, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।