उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच जारी है, लेकिन यात्रा के दौरान बढ़ती मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। यात्रा शुरू होने के केवल 25 दिनों के भीतर 40 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार 13 मई तक 12 लाख 64 हजार 217 श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे अधिक 22 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं। इसके अलावा बद्रीनाथ में 7, यमुनोत्री में 6 और गंगोत्री में 5 श्रद्धालुओं की जान गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अधिकतर मौतों की वजह हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाई ब्लड प्रेशर और पुरानी बीमारियां रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चारधाम यात्रा के कई मार्ग ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं, जहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कम होता है। ऐसे में बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सांस लेने में दिक्कत, थकान और अचानक स्वास्थ्य खराब होने जैसी समस्याएं अधिक हो रही हैं। खासतौर पर केदारनाथ यात्रा का कठिन ट्रैक श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बन रहा है।
राज्य सरकार ने यात्रा शुरू होने से पहले स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और मेडिकल टीमों की तैनाती के दावे किए थे। यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी कर हृदय रोग, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को यात्रा से पहले हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे मौतों के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री Subodh Uniyal ने यात्रियों से अपील की है कि वे शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि कई श्रद्धालु कम समय में यात्रा पूरी करने के उत्साह में तेजी से चढ़ाई करते हैं, जिससे हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड की समस्या बढ़ जाती है। प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने, पर्याप्त आराम करने और परेशानी होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लेने की सलाह दी है।