बच्चों के भविष्य को लेकर राज्यपाल का बड़ा संदेश, अब बदलनी होगी सोच

देहरादून। Gurmit Singh ने कहा है कि बाल कल्याण परिषद को समय के साथ नई सोच, आधुनिक कार्यशैली और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बच्चों का कल्याण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का पवित्र दायित्व है। जिन बच्चों के पास संसाधनों, सुरक्षा और अवसरों की कमी है, उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए संवेदनशील और सक्रिय प्रयास जरूरी हैं।

राज्यपाल गुरुवार को लोक भवन में आयोजित Uttarakhand State Child Welfare Council की 17वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने परिषद के सदस्यों से अधिक सक्रियता और समर्पण के साथ काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि अब केवल पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित कर संतुष्ट होने का समय नहीं है, बल्कि बच्चों को 21वीं सदी की चुनौतियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विकसित भारत के विजन के अनुरूप तैयार करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, अधिकार और समग्र विकास को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जानी चाहिए।

बैठक में राज्यपाल ने प्रत्येक जिले में प्रभावी “बाल कल्याण केंद्र” विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों तक योजनाओं और सहायता का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। इसके लिए जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि संसाधनों की कमी से ज्यादा जरूरी सकारात्मक सोच और सामाजिक भागीदारी है। उन्होंने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से बाल कल्याण गतिविधियों को और मजबूत बनाने पर बल दिया।

बैठक के दौरान नव नियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को एक महीने के भीतर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि जल्द ही समीक्षा बैठक आयोजित कर बाल कल्याण से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और परिणाम आधारित फैसले लिए जाएंगे।

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