देहरादून। उत्तराखंड में चाय उत्पादन को नई पहचान दिलाने की दिशा में प्रदेश सरकार तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री Ganesh Joshi ने असम दौरे के दौरान बरपाथार स्थित प्रसिद्ध चाय बागानों का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां की उत्पादन क्षमता, प्रसंस्करण तकनीक और विपणन व्यवस्था का गहन अध्ययन किया।
दौरे के दौरान कृषि मंत्री ने स्थानीय चाय उत्पादकों, निर्यातकों और विशेषज्ञों के साथ बैठक भी की। बैठक में उत्तराखंड में चाय उत्पादन को बढ़ावा देने, गुणवत्ता सुधारने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपणन मजबूत करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु उच्च गुणवत्ता वाली चाय उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है और राज्य में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि असम के चाय उद्योग की आधुनिक तकनीकों और अनुभवों का अध्ययन कर उत्तराखंड में भी चाय उत्पादन को नई दिशा दी जाएगी। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की चाय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने के लिए प्रभावी मार्केटिंग रणनीति तैयार की जाएगी। इससे स्थानीय किसानों को बेहतर दाम और रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। चाय उद्योग के विकास से पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर Mahesh Jeena, Anil Nautiyal, कृषि सचिव डॉ. एसएन पांडेय, चाय निदेशक महेंद्र पाल सहित कई अधिकारी और चाय उत्पादक मौजूद रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तराखंड में चाय उद्योग को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया गया, तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।