ईरान तनाव में घिरा अमेरिका: ट्रंप पर बढ़ा दबाव, पेंटागन ने मानी बड़ी कमजोरी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की स्थिति लगातार कमजोर होती नजर आ रही है। ईरान के बढ़ते प्रभाव और रूस-चीन जैसे देशों के समर्थन ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच Pentagon ने स्वीकार किया है कि मौजूदा अमेरिकी रक्षा प्रणाली आधुनिक मिसाइल खतरों के सामने काफी हद तक बेअसर है।

सीनेट में वित्त वर्ष 2027 के रक्षा बजट पर चर्चा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका की रक्षा प्रणाली मुख्यतः छोटे स्तर के हमलों को रोकने के लिए डिजाइन की गई थी। हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइल जैसे उन्नत हथियारों के खिलाफ यह पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रही है। Mark J. Burkowitz ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा सिस्टम आधुनिक खतरों के अनुरूप नहीं है।

इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी सिचुएशन रूम की बैठक में पेंटागन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रक्षा विभाग राष्ट्रपति को पूरी जानकारी नहीं दे रहा, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। वेंस ने चेताया कि अमेरिका के हथियार भंडार भी तेजी से घट रहे हैं, जो भविष्य के संघर्षों के लिए गंभीर संकेत है।

अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल Michael A. Guetlein ने भी माना कि अब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य बदल चुका है और अमेरिका की सुरक्षा पहले जैसी मजबूत नहीं रही। खासतौर पर चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक ने अमेरिकी रक्षा तंत्र में बड़ी खामियां उजागर कर दी हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिका ‘गोल्डन डोम’ नामक नई रक्षा परियोजना पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत अंतरिक्ष आधारित सेंसर, एआई-आधारित कमांड सिस्टम और लेजर जैसी नई तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। हालांकि, इस महंगी परियोजना को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी विवाद बढ़ गया है।

बढ़ते दबाव के बीच ट्रंप के सामने अब ईरान को लेकर बड़ा फैसला लेने की चुनौती है। अगर हालात काबू में नहीं आए, तो यह टकराव न सिर्फ अमेरिका बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

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