काकड़ी गांव में भगवान परशुराम की पालकी पहुंचते ही क्यों उमड़ा जनसैलाब?

साहिया।  हिमाचल प्रदेश के महासू गांव से काकड़ी गांव पहुंची भगवान परशुराम देवता की पावन पालकी का ग्रामवासियों ने श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया। पालकी के आगमन से पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण और पारंपरिक संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिली।

देवता के स्वागत के लिए गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंचे। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की भी विशेष व्यवस्था की गई, जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस धार्मिक आयोजन की एक विशेष बात यह रही कि ग्रामवासियों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए प्राकृतिक जल स्रोतों के उपयोग को प्राथमिकता दी। इस बार श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था गांव के पारंपरिक जल स्रोतों से की गई, जबकि पहले ऐसे आयोजनों में पानी बाहर से खरीदकर मंगाया जाता था। इस निर्णय से न केवल अनावश्यक खर्च में कमी आई, बल्कि जल संरक्षण का भी प्रभावी संदेश दिया गया।

ग्राम प्रधान सुंदर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस पहल से लोगों में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सतत जल उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी गांव ऐसे आयोजनों में पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देगा।

वहीं अनिल सिंह तोमर, जो एसएमआर जनजातीय पीजी कॉलेज के चेयरमैन हैं, ने काकड़ी गांव की इस पहल को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना समाज के लिए प्रेरणादायक कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य गांव भी इस पहल से प्रेरित होकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में कदम उठाएंगे।

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