मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ में हुई। बदरीनाथ थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार, मंदिर में ‘थाली भेंट गणना’ के दौरान प्रमोद नौटियाल पर चढ़ावे की धनराशि चोरी करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि आरोपी को 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था, जबकि पांच हजार रुपये की कथित बरामदगी 28 जुलाई को दिखाई गई। यानी गिरफ्तारी के 16 दिन बाद एक सार्वजनिक धर्मशाला से बरामदगी दर्शाई गई। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और पुलिस न्यायालय में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है। ऐसे में आरोपी को जेल में रखने की आवश्यकता नहीं है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने का निर्णय लिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान आरोपी किसी भी गवाह को धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा। इसके अलावा वह मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा और सुनवाई के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहेगा। आरोपी को बिना न्यायालय की अनुमति देश छोड़ने की भी इजाजत नहीं होगी।

