इस मामले में अदालत ने तीन नवंबर को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप महज सामान्य वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं हैं। इनमें शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूटरचना, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया सामने आते हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 22 साल पुराने वैवाहिक संबंधों का हवाला देकर कथित अपराधों को समाप्त नहीं माना जा सकता। ऑडियो रिकॉर्डिंग और कथित फर्जी दस्तावेजों की सत्यता जांच का विषय है। इस स्तर पर अदालत द्वारा साक्ष्यों का परीक्षण कर मिनी ट्रायल करना उचित नहीं होगा।
गौरतलब है कि मंत्री रेखा आर्य ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, मारपीट, जालसाजी, धमकी और एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि शादी के समय पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाई गई। इसके अलावा कंपनियों से हटाने, शेयर बेचने और राजनीतिक छवि खराब करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इसके बाद गिरधारी साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी से राहत मांगी थी। उन्होंने अपने बचाव में शादी वर्ष 2004 में होने और लंबे समय तक साथ रहने का तर्क दिया था।
उधर, मामले की जांच कर रही एसआईटी के अनुसार गिरधारी साहू को तीन नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन वह पेश नहीं हुए। पुलिस पहले ही गैर-जमानती वारंट हासिल कर चुकी है। अब हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

