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नेशनल कॉन्फ्रेंस में बड़ी बगावत की तैयारी? 25 विधायकों की नाराजगी, नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम

जम्मू। जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी असंतोष बढ़ने की खबरों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के कई विधायकों की नाराजगी सामने आने के दावों के बीच अब 25 विधायकों के एकजुट होने और पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम देने की चर्चा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों का एक गुट मौजूदा मंत्रिमंडल के गठन से खुश नहीं है। बताया जा रहा है कि नाराज विधायक सभी मंत्रियों और मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाकर विधायकों की सहमति से नया मंत्रिमंडल गठित करने की मांग कर रहे हैं। यदि यह मांग औपचारिक रूप से सामने आती है, तो इसे पार्टी के भीतर नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर बढ़ते मतभेद के रूप में देखा जाएगा।

इस घटनाक्रम में विधायकों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। शुरुआत में करीब 18 विधायकों के नाराज होने की चर्चा थी, जबकि अब यह संख्या 25 बताई जा रही है। हालांकि, विधायकों की नाराजगी को सरकार से समर्थन वापस लेने या पार्टी में औपचारिक बगावत के बराबर नहीं माना जा सकता।

बहुमत के गणित पर टिकी नजरें

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और सामान्य परिस्थितियों में बहुमत के लिए 46 विधायकों का समर्थन जरूरी है। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। भाजपा को 29, कांग्रेस को छह और पीडीपी को तीन सीटें मिली थीं। ऐसे में सरकार की स्थिरता का आकलन असंतुष्ट विधायकों की संख्या के बजाय विधानसभा में वास्तविक समर्थन के आधार पर होगा।

रूहुल्लाह मेहदी को लेकर भी चर्चाएं

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी को लेकर भी कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं। उनके पार्टी से इस्तीफे, तीन नवंबर को लोकसभा सदस्यता छोड़ने और नया राजनीतिक विकल्प तैयार करने की चर्चाएं हैं। हालांकि, इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रूहुल्लाह मेहदी अनुच्छेद 370, जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक अधिकारों और राज्य के दर्जे जैसे मुद्दों पर लगातार मुखर रहे हैं। ऐसे में उनके किसी अलग राजनीतिक रास्ते को चुनने की स्थिति में इसका असर पार्टी के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर की व्यापक राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सबकी नजरें नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व की प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में विधायकों के रुख पर टिकी हैं।

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