मीडिया से बातचीत के दौरान दिल्ली में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी के उत्तराखंड दौरे से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए भट्ट ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक नवंबर की तारीख चुनना कांग्रेस की सोच को दर्शाता है। उनके अनुसार, 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में जो हिंसा हुई, उसे आज भी भुलाया नहीं जा सकता।
भट्ट ने आरोप लगाया कि उस दौर में कांग्रेस नेताओं की भूमिका के कारण देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को गहरी चोट पहुंची थी। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के हजारों लोगों की हत्या की घटनाएं देश के इतिहास का दुखद अध्याय हैं। ऐसे संवेदनशील दिन पर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने के फैसले पर कांग्रेस को विचार करना चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इन नेताओं को देवभूमि की राष्ट्रवादी जनता गंभीरता से नहीं लेती। भट्ट ने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं के बार-बार उत्तराखंड आने से भाजपा की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने के बजाय और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता राष्ट्रवाद और सनातन परंपराओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता रखती है। भट्ट के मुताबिक, कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का आगामी चुनावों में भाजपा पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
भाजपा नेता के इन बयानों से कांग्रेस की प्रस्तावित रैली और उत्तराखंड दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं।
