इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने रामायण जैसे महान महाकाव्य के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादाओं को जन-जन तक पहुंचाया। महर्षि वाल्मीकि का जीवन हमें सिखाता है कि व्यक्ति अपने विचारों और कर्मों से समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने ऐसे समाज की कल्पना को साकार करने का संदेश दिया, जहां भेदभाव के लिए कोई स्थान न हो। उनकी शिक्षाएं बताती हैं कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसकी जाति या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, कर्म और समाज के प्रति योगदान से होती है।
उन्होंने कहा कि रामायण सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य जैसे मानवीय मूल्यों का संदेश देती है। यह हमें प्रेम, समानता, बंधुत्व और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करना सिखाती है। सनातन संस्कृति भी सदैव समाज में आपसी सम्मान, सद्भाव और समरसता बनाए रखने की प्रेरणा देती रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। देश में अपनी जड़ों से जुड़ने, इतिहास को समझने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का वातावरण बना है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण इसी सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को स्थान दिया जाना सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को आत्मसात कर समानता, सद्भाव और सामाजिक एकता को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
