उत्तराखंड पुलिस के आईजी अनंत कुमार ताकवाले ने प्रशिक्षण अभियान में डॉ. चौधरी के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों से पुलिस विभाग के निर्देशन और कुंभ मेला पुलिस के समन्वय से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा था। इसमें कुंभ और अर्धकुंभ मेलों में कार्य करने का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों के माध्यम से पुलिसकर्मियों को आवश्यक जानकारियां दी गईं।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. चौधरी ने कुंभ मेले के इतिहास, भीड़ नियंत्रण की रणनीतियों, अखाड़ों की परंपराओं, पेशवाई और शाही स्नान यानी अमृत स्नान की व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही पिछले कुंभ मेलों में हुई महत्वपूर्ण घटनाओं, उनसे संबंधित जांच आयोगों की रिपोर्ट और उनके अनुपालन से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
उन्होंने पुलिसकर्मियों को स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, साधु-संतों, आश्रमों, धर्मशालाओं, होटलों और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सभी संबंधित पक्षों की सहभागिता महत्वपूर्ण होती है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि वर्ष 2027 के कुंभ में श्रद्धालुओं और यात्रियों की संख्या पहले के आयोजनों की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रमुख स्नान पर्वों के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण भीड़ प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ सकती है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के साथ मानसिक रूप से तैयार करना भी जरूरी है।
कुंभ मेला एसएसपी आयुष अग्रवाल और आईजी अनंत कुमार ताकवाले ने सभी 13 चरणों में 3505 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए डॉ. चौधरी का आभार जताया और उनके प्रयासों की सराहना की।
