गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उर्मिला सनावर ने 23 अक्टूबर को अदालत में नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए सहमति दी थी। इसके दो दिन बाद, 25 अक्टूबर को उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार किए जाने और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई। उन्होंने इस घटनाक्रम पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि गिरफ्तारी से अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवाल समाप्त नहीं हो जाते। इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही मिल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी अन्य मामले में दर्ज शिकायत की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन उसका असर अंकिता हत्याकांड से जुड़े पहलुओं की जांच पर नहीं पड़ना चाहिए।
दसौनी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की जनता की भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मामला है। अंकिता के माता-पिता लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि मामले से संबंधित हर सवाल की गंभीरता से जांच हो और जनता के सामने तथ्य स्पष्ट किए जाएं।
उन्होंने धामी सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों पर जांच की वर्तमान स्थिति क्या है। साथ ही, उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाई जाए और दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
