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ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसा: 14 मौतें, पुलिस के स्टॉपर तोड़कर कैसे पहुंचा ट्रक?

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित शीतला माता मंदिर में रविवार तड़के हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। सप्तमी पर देवी दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच अनियंत्रित भारी ट्रक घुस गया। ट्रक पुलिस के स्टॉपर तोड़ते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार तक पहुंचा और रास्ते में श्रद्धालुओं व प्रसाद की दुकानों को रौंद दिया। भीषण टक्कर से मंदिर की दीवार ढह गई, जिससे कई लोग ट्रक और मलबे के नीचे दब गए। जिला प्रशासन के अनुसार, हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल अस्पतालों में भर्ती हैं।

रात 1:30 बजे हुआ भीषण हादसा

हादसा शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे हुआ। सप्तमी के कारण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दौरान चीनौर रोड की ढलान से भारी सामान से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर नीचे आया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टक्कर के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

मृतकों में किशोर और महिलाएं भी शामिल

प्रशासन ने 14 लोगों की मौत की पुष्टि की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मृतकों में सत्येंद्र गुर्जर (22), सरला तोमर (50), गौरव परिहार (18), महेश शर्मा (45), विमलेश (18), देवेश बघेल (17), प्रिंस उर्फ छोटू जाटव (16) और शौर्य शर्मा (15) शामिल हैं। शेष छह मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। हादसे के बाद अस्पतालों में परिजन अपनों की तलाश करते रहे। घायलों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल हैं।

स्टॉपर टूटने के बाद भी नहीं रुका ट्रक

पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव के अनुसार, श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर की ओर भारी वाहनों का प्रवेश रोकने की व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद ट्रक स्टॉपर तोड़कर भीड़ तक पहुंच गया। हादसे में ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मी और एक होमगार्ड जवान भी घायल हुए हैं।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि ट्रक के अनियंत्रित होने और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की जांच की जा रही है। प्रशासन घायलों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ जरूरतमंद परिजनों को रेडक्रॉस के माध्यम से सहायता देने में जुटा है।

इस हादसे ने धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रतिबंध के बावजूद भारी ट्रक श्रद्धालुओं के बीच आखिर कैसे पहुंचा?

 

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