शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। विद्यालयों के उच्चीकरण से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में आगे की कक्षाओं में पढ़ने का अवसर मिलेगा। इससे बच्चों को दूसरे स्थानों पर जाने की परेशानी से राहत मिलेगी और स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या यानी ड्रॉपआउट दर में भी कमी आने की उम्मीद है।
डॉ. रावत ने बताया कि उच्चीकृत किए गए 62 विद्यालयों में आठ हाईस्कूल स्तर और 54 इंटरमीडिएट स्तर के विद्यालय शामिल हैं। जिलेवार इनमें पौड़ी और चमोली के चार-चार, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, देहरादून, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के तीन-तीन, टिहरी और बागेश्वर के पांच-पांच, हरिद्वार के सात, नैनीताल के छह तथा चंपावत और ऊधमसिंह नगर के आठ-आठ विद्यालय शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि लंबे समय से विद्यालयों के उच्चीकरण की मांग कर रहे थे। पिथौरागढ़ के जिबली और चमोली के मानमती में इस मांग को लेकर लोगों ने धरना भी दिया था। सरकार ने इन मांगों पर कार्रवाई करते हुए विद्यालयों का उच्चीकरण किया है। अब उच्चीकृत कक्षाओं में प्रवेश भी शुरू कर दिए गए हैं।
शिक्षा मंत्री ने मुख्य शिक्षा अधिकारियों को उच्चीकृत विद्यालयों में शिक्षकों और फर्नीचर की कमी दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से इंटरमीडिएट तक ड्रॉपआउट दर शून्य करने और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
कार्यक्रम में विधायक भोपाल राम टम्टा, विधायक सुरेश चौहान, सचिव विद्यालयी शिक्षा ज्योति यादव, एससीईआरटी निदेशक वंदना गब्र्याल, माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद कुमार सिमल्टी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न जनपदों के अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने भी वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।
