मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने और आम जनता को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्री के दिशा-निर्देशों तथा आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विनय शंकर पाण्डेय के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी और निरीक्षण किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान विभागीय टीम ने विश्वविद्यालय की मेस और कैफेटेरिया में खाद्य सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम ने खाद्य लाइसेंस, पानी की जांच रिपोर्ट, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, पेस्ट कंट्रोल सर्टिफिकेट और फूड सेफ्टी ट्रेनिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से निरीक्षण टीम को संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराए गए।
इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और भोजन तैयार करने से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं के अनुपालन की स्थिति भी देखी गई। निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराने वाले प्रतिष्ठान निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए पानी, पकी हुई दाल और सब्जी के नमूने लिए गए हैं। इन नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही उनकी गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच रिपोर्ट में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मेस और कैफेटेरिया में भोजन करते हैं। ऐसे में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और गुणवत्तायुक्त भोजन की उपलब्धता विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करना और खाद्य कारोबारियों को निर्धारित मानकों के प्रति जवाबदेह बनाना है।
