बैठक में दोनों राष्ट्रीय उद्यानों के प्रस्तावित ईको-सेंसेटिव जोन के क्षेत्रफल और विस्तार समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा जोनल मास्टर प्लान तैयार करने, निगरानी समिति के गठन तथा क्षेत्र में प्रतिबंधित, विनियमित और अनुमत गतिविधियों को लेकर भी विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।
प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्ताव तैयार करने से पहले सभी संबंधित बिंदुओं का गहन परीक्षण किया जाए। उन्होंने ईको-सेंसेटिव जोन के अंतर्गत आने वाली गतिविधियों के संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त कर तथ्यों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के प्रस्तावित ईको-सेंसेटिव जोन की समीक्षा के दौरान पर्यटकों की आवाजाही और क्षेत्र की वहन क्षमता को विशेष महत्व दिया गया। प्रमुख सचिव ने संबंधित जिलाधिकारी, पर्यटन विभाग और अन्य विभागों से आवश्यक रिपोर्ट लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा। इसका उद्देश्य क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों के नियोजन पर विचार करना है।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि ईको-सेंसेटिव जोन से जुड़े प्रस्ताव तैयार करते समय संबंधित क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय आवश्यकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा के साथ स्थानीय हितों का भी समुचित ध्यान रखा जा सके।
बैठक में दिए गए निर्देशों के तहत संबंधित विभागों और जिला प्रशासन से रिपोर्ट लेकर प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
