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मंडी में धान लेकर पहुंच रहे किसान, खरीद पर क्यों फंसा पंजीकरण का पेच?

सितारगंज। मंडी में धान लेकर पहुंचने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन खरीफ खरीद सत्र 2026-27 में कच्चे आढ़तियों के माध्यम से धान खरीद की व्यवस्था अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। विभाग और राइस मिलर्स के बीच पंजीकरण की शर्तों को लेकर सहमति नहीं बनने से खरीद प्रक्रिया पर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में अपनी उपज बेचने के इंतजार में बैठे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है।

खरीद व्यवस्था को लेकर मंडी समिति सितारगंज में राइस मिल एसोसिएशन, कच्चे आढ़तियों और मंडी समिति के वरिष्ठ विपणन अधिकारियों की बैठक हुई। विभागीय पत्र के अनुसार, अब तक किसी भी कच्चे आढ़ती या राइस मिलर ने पंजीकरण के लिए जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं।

बैठक में कच्चे आढ़तियों ने पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले तीन प्रमुख बिंदुओं पर लिखित आश्वासन मांगा। उन्होंने कस्टम हिलिंग के लिए बैंक गारंटी के सापेक्ष मिलों को मिलने वाले धान की मात्रा स्पष्ट करने की मांग की। इसके अलावा कच्चा आढ़ती मद में खरीदे गए धान पर मंडी शुल्क और विकास सेस जमा करने की जिम्मेदारी किसकी होगी, इस पर भी स्थिति साफ करने को कहा। निर्धारित समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में ब्याज का भुगतान किस स्तर से किया जाएगा, इसे लेकर भी लिखित जानकारी मांगी गई।

कच्चे आढ़तियों ने खरीफ खरीद सत्र 2025-26 में खरीदे गए धान से तैयार चावल के उतार की समयसीमा तय करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद ही पंजीकरण को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

विभागीय पत्र के मुताबिक, पिछले वर्ष पंजीकृत मिलर्स में से 34 ने अगले दिन से कस्टम हिलिंग का काम शुरू करने पर सहमति जताई है। बैठक में उठाए गए सवालों और मांगों से संबंधित पत्र आवश्यक कार्रवाई के लिए संभागीय खाद्य नियंत्रक, कुमाऊं संभाग, हल्द्वानी को भेजा गया है।

अब विभाग के निर्णय पर खरीद व्यवस्था की आगे की दिशा निर्भर करेगी। किसानों को राहत देने के लिए जरूरी है कि पंजीकरण संबंधी शंकाओं का जल्द समाधान हो और धान खरीद सुचारु रूप से शुरू हो सके।

 

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