हरिद्वार। नशे के खिलाफ जनजागरण का संदेश लेकर रविवार को शांतिकुंज और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के युवा सड़कों पर उतरे। अखिल विश्व गायत्री परिवार और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय से नशामुक्ति रैली निकाली गई। रैली में विद्यार्थियों, युवाओं, शांतिकुंज कार्यकर्ताओं और गायत्री परिवार के परिजनों समेत एक हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया।
रैली के दौरान युवाओं के हाथों में नशामुक्ति का संदेश देती तख्तियां थीं और वे लगातार जनजागरण के नारे लगा रहे थे। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय से शुरू हुई रैली हरिपुर कलां होते हुए शांतिकुंज पहुंची। इस दौरान ‘नशा भारत छोड़ो’, ‘व्यसन छोड़ें-सृजन से जुड़ें’ और ‘नशामुक्त युवा-समर्थ भारत’ जैसे नारों से क्षेत्र गूंजता रहा। प्रतिभागियों ने राहगीरों और स्थानीय लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया।
शांतिकुंज पहुंचने के बाद रैली सभा में बदल गई। गायत्री विद्यापीठ की प्रबंधिका शैफाली पण्ड्या ने प्रतिभागियों को ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि युवा अपनी ऊर्जा को नशे से दूर रखते हुए शिक्षा, सेवा, साधना, रचनात्मक कार्य और राष्ट्र निर्माण में लगाएं तो विकसित भारत के लक्ष्य को नई गति मिल सकती है।
शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि ने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। परिवार, शिक्षण संस्थान और सामाजिक संगठन मिलकर युवाओं को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस दौरान देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के युवाओं ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से नशे की गिरफ्त में आने वाले व्यक्ति और उसके परिवार पर पड़ने वाले सामाजिक व पारिवारिक दुष्प्रभावों को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया। युवाओं ने अपने साथियों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
यह रैली ‘100 रविवार, एक उद्देश्य’ अभियान के तहत आयोजित की गई। समापन पर प्रतिभागियों ने स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी नशामुक्त बनाने में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में देसंविवि के कुलसचिव बलदाउ देवांगन, एनसीसी, भारत स्काउट एवं गाइड से जुड़े युवा तथा मंत्रालय के अधिकारी मौजूद रहे।
