कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हुगली के श्रीरामपुर में जनसभा करने की अनुमति दे दी है, लेकिन जीटी रोड पर प्रस्तावित जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी। अदालत ने कार्यदिवस के दौरान संकरी सड़क पर यातायात प्रभावित होने और पहले जारी निर्देशों के कथित उल्लंघन को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक असीत मजूमदार की याचिका पर सुनवाई करते हुए महेश जगन्नाथ देव स्नानपीरी मैदान में दोपहर एक बजे से तीन बजे तक सभा आयोजित करने की अनुमति दी। अदालत ने सभा में अधिकतम 2,000 लोगों के शामिल होने की सीमा तय की है। साथ ही स्पष्ट किया कि कार्यक्रम के दौरान ऐसा कोई बयान नहीं दिया जाना चाहिए, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका हो। पुलिस को भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार की ओर से जुलूस का विरोध करते हुए कहा गया कि जीटी रोड संकरी सड़क है और इसे यातायात के लिए खुला रखना जरूरी है। सरकार ने अदालत को बताया कि सड़क के आसपास अस्पताल, स्कूल और दमकल केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं। साथ ही इलाके को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील बताते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चिंता भी जताई गई।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल सांसद कल्याण बंदोपाध्याय ने दलील दी कि अन्य राजनीतिक दलों को जीटी रोड पर कार्यक्रम करने की अनुमति मिलती रही है, लेकिन ममता बनर्जी के कार्यक्रम पर ही आपत्ति की जा रही है। उन्होंने हाल में जादवपुर में हुई एक राजनीतिक रैली के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का भी उल्लेख किया।
इसके बाद बंदोपाध्याय ने जुलूस के बजाय स्नानपीरी मैदान में सभा आयोजित करने का विकल्प सुझाया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ आम लोगों की सुविधा और पुलिस-प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
अदालत ने ममता बनर्जी के पूर्व कार्यक्रमों का हवाला देते हुए 21 जुलाई और 28 अगस्त को दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। इन कार्यक्रमों में कैथेड्रल रोड की एक लेन खुली रखने का निर्देश था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार दोनों मौकों पर यातायात प्रभावित हुआ था।