नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना गुणवत्तापूर्ण और विश्वस्तरीय शिक्षा के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान में निहित समान अवसर के आदर्श को वास्तविक रूप देने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। इसलिए देश में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी विद्यार्थी अच्छी शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
राष्ट्रपति नई दिल्ली में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने शिक्षकों का सम्मान करता है, वह वास्तव में प्रगतिशील समाज होता है। शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला हैं और अपने ज्ञान, स्नेह व समर्पण से विद्यार्थियों में न केवल ज्ञान, बल्कि नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं।
राष्ट्रपति ने ओडिशा के रायरंगपुर स्थित श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में अपने शिक्षण कार्य के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अपने विद्यार्थियों को पढ़ाने के दौरान उन्होंने स्वयं भी बहुत कुछ सीखा। छात्रों से मिला प्रेम और स्नेह उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों से जुड़े शिक्षकों की बड़ी संख्या पर राष्ट्रपति ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेता शिक्षकों के कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्मों को देखने के बाद उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि समर्पित शिक्षक देश के अग्रिम पंक्ति के राष्ट्र निर्माता हैं।
उन्होंने राजस्थान के झालावाड़ जिले के एक ग्रामीण शिक्षक का उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक और शिक्षण माध्यमों के इस्तेमाल से बच्चों को जीव विज्ञान जैसे विषय को अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ाया जा सकता है। राष्ट्रपति ने इसे आधुनिक शिक्षण पद्धति का प्रेरक उदाहरण बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि करीब 12 वर्ष पहले प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर लगभग 4.5 प्रतिशत थी, जो अब नगण्य रह गई है। उन्होंने इस उपलब्धि में शिक्षकों के निरंतर प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, राज्यमंत्री जयंत चौधरी और सुकांत मजूमदार समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।