नोएडा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने उद्यमियों से रक्षा क्षेत्र को केवल सरकारी खरीद का बाजार मानने के बजाय तकनीक, नवाचार और वैश्विक कारोबार के अवसर के रूप में देखने का आह्वान किया। ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) की 35वीं वार्षिक जनरल मीटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट और एमएसएमई अवार्ड कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 1,000 से अधिक उद्यमियों ने हिस्सा लिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि आईडेक्स और अदिति जैसी सरकारी पहल ने स्टार्टअप, इनोवेटर्स और MSME को सशस्त्र बलों की जरूरतों के अनुरूप नए समाधान विकसित करने का अवसर दिया है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों के प्रमुखों के साथ करीब तीन घंटे बैठक की। इस दौरान जानकारी मिली कि लगभग 16,000 MSME उद्योग रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में MSME की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और आने वाले वर्षों में यह और बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल आर्थिक रूप से मजबूत देश बनना नहीं है, बल्कि ऐसा भारत बनाना है जो विनिर्माण, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके और युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करे। MSME छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक आर्थिक गतिविधियों को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर दुनिया एक भरोसेमंद विनिर्माण साझेदार की तलाश में है और भारत के पास इस अवसर का लाभ उठाने की क्षमता है। विभिन्न देशों और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों की दिशा में बढ़ते कदम MSME के लिए नए वैश्विक बाजार खोल सकते हैं।
उन्होंने उद्यमियों से कहा कि लक्ष्य केवल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर इंडिया’ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ होना चाहिए। उन्होंने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, ऑटोनॉमस सिस्टम, स्पेस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं का उल्लेख किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य छोटे उद्यमियों की भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता। MSME को उत्पाद निर्माण के साथ बौद्धिक संपदा और अत्याधुनिक तकनीक पर भी ध्यान देना होगा।