राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय तन्वी की एम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही थी और करीब 13 वर्षों से उपचार के लिए एम्स के संपर्क में थी। मंगलवार को उसकी हालत बिगड़ने के बाद उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार ने इलाज और सर्जरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, एम्स प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है।
एम्स के अनुसार, तन्वी को पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी ओपीडी में लाया गया था। जांच में उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट और पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी जटिल जन्मजात हृदय संबंधी बीमारी का पता चला था। इसके बाद उसे हृदय शल्य चिकित्सा टीम के पास भेजा गया।
वर्ष 2013 में सीटी एंजियोग्राफी, एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथेटराइजेशन समेत कई जांच की गईं। एम्स के मुताबिक, इन रिपोर्टों के आधार पर 2017 में चिकित्सकीय टीम ने निष्कर्ष निकाला कि हृदय की जटिल संरचना के कारण सुधारात्मक सर्जरी संभव नहीं थी। इसके बाद दवाओं और नियमित फॉलोअप के जरिए उपचार जारी रखने की सलाह दी गई।
परिवार ने बाद के वर्षों में भी सर्जरी की संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञों से राय ली। पिछले वर्ष सीटीवीएस विभाग के प्रमुख और बाद में एक वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से परामर्श किया गया। दोनों स्तरों पर मेडिकल मैनेजमेंट जारी रखने की सलाह दी गई।
अगस्त 2026 में तन्वी की तबीयत बिगड़ने पर उसे 24 अगस्त को दोबारा एम्स में भर्ती कराया गया। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना का भी मूल्यांकन किया जा रहा था। 1 सितंबर की तड़के उसकी हालत अचानक बिगड़ी और ऑक्सीजन स्तर करीब 48 प्रतिशत तक गिर गया। ऑक्सीजन सपोर्ट देने के बाद उसे कार्डियक अरेस्ट आया। डॉक्टरों ने बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सुबह 5:06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।
तन्वी के पिता ने डॉक्टरों की लापरवाही का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। एम्स ने कहा है कि जांच समिति मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार, विशेषज्ञों की राय और मौत की परिस्थितियों की समीक्षा करेगी। ऑटोप्सी रिपोर्ट और समिति की रिपोर्ट आने तक मौत के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।