कमाई बढ़ी फिर भी मुनाफा घटा, इस कैंसर दवा ने बिगाड़ा फार्मा कंपनियों का खेल

मुंबई,  भारतीय दवा कंपनियों के लिए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कारोबार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंपनियों की कुल कमाई और कामकाजी मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद शुद्ध मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। इसकी प्रमुख वजह अमेरिकी बाजार में कैंसर की दवा जेनेरिक रेव्लिमिड यानी लेनालिडोमाइड की कीमतों और बिक्री में आई बड़ी गिरावट बताई जा रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पहली तिमाही में दायरे में शामिल दवा कंपनियों की कुल कमाई 14.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कामकाजी मुनाफे में 6.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके बावजूद शुद्ध मुनाफा 4.1 प्रतिशत घट गया। अमेरिकी बाजार में लेनालिडोमाइड की कीमतों में कमी को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह दवा विशेष रूप से मल्टीपल मायलोमा जैसे कैंसर के उपचार में इस्तेमाल की जाती है।

रेव्लिमिड मूल दवा का ब्रांड नाम है, जबकि लेनालिडोमाइड इसका जेनेरिक संस्करण है। पेटेंट विवादों के बाद हुए समझौतों के तहत भारतीय कंपनियों को मार्च 2022 के बाद अमेरिका में सीमित मात्रा में जेनेरिक लेनालिडोमाइड बेचने की अनुमति मिली थी। सीमित प्रतिस्पर्धा के कारण शुरुआती वर्षों में इस दवा से कंपनियों को काफी बेहतर मार्जिन मिला।

डॉ. रेड्डीज और सिप्ला जैसी कंपनियां भी इस कारोबार से लाभान्वित हुईं। जनवरी 2026 तक बिक्री की मात्रा पर कुछ सीमाएं लागू थीं। इस वजह से अमेरिकी बाजार में जेनेरिक लेनालिडोमाइड की आपूर्ति सीमित रही और कीमतें अपेक्षाकृत ऊंची बनी रहीं।

हालांकि, जनवरी 2026 के आसपास बिक्री संबंधी प्रतिबंधों में बदलाव और बाजार में अधिक जेनेरिक कंपनियों की एंट्री के बाद प्रतिस्पर्धा तेज हो गई। कंपनियों की संख्या और आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया। इसका सीधा असर भारतीय फार्मा कंपनियों के मार्जिन और शुद्ध मुनाफे पर पड़ा।

डॉ. रेड्डीज के मार्च तिमाही के नतीजों में भी लेनालिडोमाइड की कीमतों में गिरावट का प्रभाव दिखाई दिया था। विशेषज्ञों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि किसी एक प्रमुख दवा पर अधिक निर्भरता बाजार में बदलाव आने पर कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है। अब भारतीय फार्मा कंपनियों के सामने अमेरिकी बाजार में नए उत्पादों और विविध कारोबार के जरिए इस दबाव की भरपाई करने की चुनौती है।

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