नई दिल्ली, एयर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की नई इक्विटी फंडिंग की मांग की है। मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, एयरलाइन को अपने व्यापक बदलाव और मौजूदा बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए तत्काल पूंजी की जरूरत है। हालांकि, फंडिंग को लेकर अभी बातचीत जारी है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
टाटा समूह ने वर्ष 2022 में एयर इंडिया का नियंत्रण संभाला था। इसके बाद यह शेयरधारकों से एयरलाइन के लिए मांगी गई सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट की गई फंडिंग मांगों में से एक मानी जा रही है। एयर इंडिया इस समय कई अरब डॉलर के परिवर्तन कार्यक्रम से गुजर रही है, जिसमें पुराने विमानों का नवीनीकरण, नए विमानों की तैयारी, तकनीकी व्यवस्था में सुधार और परिचालन ढांचे को मजबूत करना शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस को संयुक्त रूप से करीब 2.33 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। यह पिछले वर्ष के नुकसान की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इस घाटे का असर एयर इंडिया में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली सिंगापुर एयरलाइंस के वित्तीय प्रदर्शन पर भी पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित फंडिंग किस्तों में उपलब्ध कराई जा सकती है। सिंगापुर एयरलाइंस को टाटा संस के साथ अपने हिस्से के अनुपात में निवेश करना होगा। एयर इंडिया और टाटा संस ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा है कि वह टाटा संस के साथ एयर इंडिया के परिवर्तन कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए काम कर रही है।
एयरलाइन की मुश्किलें कई मोर्चों पर बढ़ी हैं। पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ान नेटवर्क में व्यवधान और पिछले साल हुए घातक विमान हादसे ने भी कंपनी पर दबाव बढ़ाया है।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एयर इंडिया को पूरी तरह बदलने में करीब एक दशक लग सकता है। एयरलाइन ने एयरबस और बोइंग से ऑर्डर किए गए कुछ विमानों की डिलीवरी में भी बदलाव का अनुरोध किया है। ऐसे में आने वाले वर्षों में एयर इंडिया को और पूंजी की जरूरत पड़ने की संभावना जताई जा रही है।