हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को राजनीतिक मुद्दा न बताते हुए इसे राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और देश के संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है। हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां चुनाव लोकतंत्र के पर्व की तरह होते हैं। हालांकि, लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का असर शासन व्यवस्था और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार चुनाव होने के कारण आचार संहिता लागू होती है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को चुनावी जिम्मेदारियों में लगाया जाता है। इससे सरकारी मशीनरी का काफी समय चुनावी प्रक्रिया में खर्च होता है और विकास एवं जनसेवा से जुड़े कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है।
धामी ने कहा कि यदि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से सार्वजनिक धन और सरकारी संसाधनों की बचत होती है तथा प्रशासन को विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा और जनजागरूकता जरूरी है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने संत-महात्माओं से इस विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने हमेशा राष्ट्र और समाज को सही दिशा देने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने संत समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके विचार और मार्गदर्शन समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के व्यापक हित से जुड़े विषयों पर समाज को जागरूक करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
धामी ने कहा कि सरकार का संकल्प लोकतंत्र को मजबूत करना, विकास की गति को निरंतर बनाए रखना, भारतीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना तथा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर संत समाज का मार्गदर्शन देश को सही दिशा देने में सहायक होगा।