देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को लोक भवन में उत्तराखंड के स्व वित्तपोषित यानी निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ दूसरे चरण की बैठक की। बैठक में 14 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया। इस दौरान विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं और सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल विद्यार्थियों को डिग्री देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। युवाओं को रोजगार, उद्योग, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को नई शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था विकसित करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा।
बैठक में अनुसंधान को बढ़ावा देने, पेटेंट संस्कृति विकसित करने, पेटेंट के व्यावसायीकरण, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग तथा विश्वविद्यालयों के बीच साझा शोध व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। राज्यपाल ने कहा कि शोध केवल पब्लिकेशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका लाभ समाज और उद्योग तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने 21वीं सदी की नई तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को मेटावर्स, सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और शोध को बढ़ावा देना होगा। साथ ही रिसर्च, पब्लिकेशन और साइटेशन की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
राज्यपाल ने युवाओं को सकारात्मक और नशामुक्त वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संस्कार, परंपराओं और चरित्र निर्माण को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने उत्तराखंड की जरूरतों और संभावनाओं से जुड़े शोध विषयों की पहचान करने की सलाह दी। ऐसे शोध को प्राथमिकता देने को कहा गया, जो राज्य के विकास में सीधे योगदान दे सके। इसके अलावा विश्वविद्यालयों को अपनी पहचान और विरासत को सुरक्षित रखने के लिए संस्थापक व विश्वविद्यालय के इतिहास पर पुस्तक, यात्रा पर फिल्म और कॉफी टेबल बुक तैयार करने का सुझाव दिया।
राज्यपाल ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय आपसी सहयोग से मजबूत अकादमिक और शोध इकोसिस्टम विकसित करें। विश्वविद्यालयों की सफलता तभी सार्थक होगी, जब उनके शोध और उपलब्धियों का लाभ विद्यार्थियों, समाज, उद्योग और प्रदेश के विकास तक पहुंचे।