गुजरात के सूरत साइबर क्राइम सेल ने देशभर में साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह ने फर्जी APK फाइलों के जरिए 5,613 से अधिक लोगों के मोबाइल फोन को निशाना बनाया और करीब 125.39 करोड़ रुपये की ठगी की।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों में जहुरुल अंसारी उर्फ चांद को जामताड़ा से संचालित साइबर ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। आरोपितों तक पहुंचने के लिए सूरत पुलिस की टीम ने झारखंड के जामताड़ा और देवघर से लेकर बिहार के पटना तक करीब 2,456 किलोमीटर की दूरी तय की।
सूरत क्राइम ब्रांच के एडिशनल सीपी करणराज वाघेला के अनुसार, जहुरुल अंसारी ने अब तक 1,248 APK फाइलें तैयार की थीं। इन फाइलों को देशभर में सक्रिय साइबर ठग गिरोहों तक पहुंचाया जाता था। आरोपित करीब 8 हजार रुपये में APK फाइल तैयार करवाकर उन्हें अलग-अलग गिरोहों को 10 हजार से 70 हजार रुपये तक में बेचते थे।
जांच में पता चला कि बैंकिंग, आरटीओ चालान, केवाईसी, सरकारी योजनाओं और अस्पतालों के नाम पर करीब 336 फर्जी APK फाइलें तैयार की गई थीं। इन्हें व्हाट्सऐप के जरिए लोगों तक भेजा जाता था। इनमें पंजाब नेशनल बैंक की असली एप जैसी दिखने वाली ‘PNB One.APK’ भी शामिल थी।
मोबाइल में ऐसी फाइल इंस्टॉल होते ही ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल कर खातों से रकम ट्रांसफर की जाती थी। ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों और कैश डिपॉजिट मशीनों के जरिए आगे भेजी जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह की 336 फर्जी APK फाइलें 31,174 से अधिक मोबाइल उपकरणों में इंस्टॉल हो चुकी थीं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
साइबर पुलिस ने लोगों को अनजान व्हाट्सऐप मैसेज, SMS या लिंक से मिलने वाली APK फाइल डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी है। बैंक, केवाईसी या आरटीओ चालान के नाम पर आने वाले संदिग्ध लिंक से भी सावधान रहने को कहा गया है। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।