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एक करोड़ का इनामी माओवादी गिरफ्तार, आखिर कैसे सुरक्षा बलों के जाल में फंसा मिसिर बेसरा?

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा को संयुक्त अभियान में गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथ संगठन के दो सक्रिय सदस्यों सहित कुल पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है। मिसिर बेसरा लंबे समय से झारखंड समेत कई राज्यों में सक्रिय था और सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।

जानकारी के अनुसार, गिरिडीह-धनबाद सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे विशेष नक्सल विरोधी अभियान के दौरान मिसिर बेसरा अपने चार सहयोगियों के साथ टाटा मैजिक वाहन से भागने की कोशिश कर रहा था। खुफिया सूचना के आधार पर पहले से सतर्क झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने धनबाद के बरवाअड्डा इलाके में वाहन को घेर लिया और सभी को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से तीन एके-47 राइफल भी बरामद की गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बेसरा के साथ रीजनल कमेटी सदस्य तुम्बा मांझी, एरिया कमेटी सदस्य बिरेन हांसदा, मंगल मुर्मू और दिनेश राय को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी से केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियां गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि संगठन के नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति और भविष्य की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा सके।

झारखंड के आईजी (अभियान) नरेंद्र कुमार सिंह ने बुधवार को इन गिरफ्तारियों की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मिसिर बेसरा के खिलाफ केवल झारखंड में ही 141 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर सुरक्षाबलों पर हमले, हत्या, लेवी वसूली, विस्फोट और अन्य नक्सली गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। वह झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय से सक्रिय रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे माओवादी संगठन की गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा और क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही पूछताछ के आधार पर नक्सली नेटवर्क से जुड़े अन्य अहम खुलासे होने की भी संभावना जताई जा रही है।

 

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