दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक और कानूनी अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जिला स्तरीय एवं स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 और राष्ट्रीय न्यास अधिनियम-1999 के तहत प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करते हुए 12 मामलों में विधिक संरक्षकता और सीमित संरक्षकता प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में आटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता तथा बहु-दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों से जुड़े ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। समीक्षा के बाद स्थानीय स्तरीय समिति ने आठ मामलों में विधिक अभिभावक नियुक्त करने का निर्णय लिया, जबकि दिव्यांगजन अधिकार नियमावली-2019 के तहत गठित जिला स्तरीय समिति ने चार मामलों में सीमित संरक्षकता मंजूर की।
अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय से ऐसे दिव्यांगजन, जो स्वयं कानूनी या वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। अब उनके लिए नियुक्त विधिक अभिभावक या सीमित संरक्षक बैंक खाता संचालन, बैंकिंग संबंधी आवश्यक प्रक्रियाएं, सरकारी दस्तावेजों से जुड़े कार्य तथा अन्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे। इससे दिव्यांगजनों को अपने अधिकारों का लाभ लेने में सुविधा होगी और उनके परिवारों को भी कानूनी प्रक्रियाओं में राहत मिलेगी।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जिन दिव्यांगजनों के माता-पिता शासकीय सेवा में कार्यरत थे और उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने में कानूनी बाधाएं आ रही थीं, वे अब विधिक अभिभावक या सीमित संरक्षक के माध्यम से पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे पात्र दिव्यांगजनों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ आवश्यक सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना भी आसान होगा।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधिक संरक्षकता और सीमित संरक्षकता से जुड़े प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र दिव्यांगजन और उनके परिवार इस व्यवस्था की जानकारी प्राप्त कर इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान के माध्यम से समाज में दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना भी आवश्यक है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला शासकीय अधिवक्ता, दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।