जनहित से जुड़े कार्यों में तेजी लाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से जनहित और नवाचार आधारित पहलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निष्प्रयोज्य एवं अनुपयोगी शासकीय वाहनों की नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग निर्धारित प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द कार्रवाई पूरी करें, ताकि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
डेंगू की रोकथाम को लेकर भी जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी कार्यालय परिसरों में नियमित साफ-सफाई कराई जाए, जलभराव न होने दिया जाए तथा पानी की टंकियों की समय-समय पर सफाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि बरसात के मौसम में डेंगू जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए सतर्कता और स्वच्छता बेहद जरूरी है।
डॉ. आशीष चौहान ने ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी संचालन पर विशेष बल देते हुए सभी विभागों को अधिकतम कार्यालयी कार्य डिजिटल माध्यम से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था से कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार आएगा।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने लंबित शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम जनता की शिकायतों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए तथा अनावश्यक रूप से लंबित मामलों में कमी लाई जाए।
सड़कों पर गड्ढों और निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सी एंड डी) अपशिष्ट की समस्या पर भी उन्होंने संबंधित विभागों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि सड़कों पर पड़े मलबे की पहचान कर उसे तत्काल हटाया जाए, ताकि यातायात बाधित न हो और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।
बैठक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिलाधिकारी ने संभावित दुर्घटनास्थलों की पहचान कर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) को अभिभावकों और विद्यालयों के लिए बच्चों की सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश तैयार कर व्यापक स्तर पर प्रचारित करने को कहा, ताकि बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।