राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ी पदक जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन उनकी सफलता के पीछे एक ऐसी टीम भी लगातार सक्रिय है जो हर पल उनकी फिटनेस और स्वास्थ्य का ध्यान रख रही है। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की मेडिकल टीम खिलाड़ियों को 24 घंटे चिकित्सा सहायता, फिजियोथेरेपी, रिकवरी और चोट प्रबंधन जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, ताकि वे हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
आधुनिक खेलों में केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस, रिकवरी और खेल विज्ञान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईओए की मेडिकल टीम खिलाड़ियों के ग्लासगो पहुंचने के पहले दिन से ही उनके साथ लगातार काम कर रही है। टीम का नेतृत्व प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनशॉ पारदीवाला कर रहे हैं। उनके साथ फिजियोथेरेपिस्ट सुमंश सिवालंका, क्रिस पेड्रा और देबाशीष दास खिलाड़ियों की चोटों के उपचार, रिकवरी और प्रतियोगिता के लिए फिट रखने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
डॉ. पारदीवाला ने बताया कि खिलाड़ियों और टीम मैनेजरों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कठिन मुकाबलों और अभ्यास के बाद जब खिलाड़ी मुस्कुराते हुए मैदान पर लौटते हैं, तो पूरी मेडिकल टीम को अपनी मेहनत सफल होती दिखाई देती है।
इस बार ग्लासगो में कोई केंद्रीय एथलीट्स विलेज नहीं बनाया गया है। भारतीय खिलाड़ियों को तीन अलग-अलग होटलों में ठहराया गया है। ऐसे में आईओए ने मर्क्योर होटल में अपना मुख्य मेडिकल सेंटर स्थापित किया है, जबकि मेडिकल स्टाफ को सभी होटलों में तैनात किया गया है, ताकि किसी भी खिलाड़ी को जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज मिल सके।
आईओए की मेडिकल टीम उन खेलों के खिलाड़ियों की भी मदद कर रही है, जिनके साथ अलग से डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध नहीं हैं। तैराकी और जिम्नास्टिक जैसे छोटे दल पूरी तरह इस केंद्रीय मेडिकल यूनिट पर निर्भर हैं। भारतीय ओलंपिक संघ का मानना है कि किसी भी पदक के पीछे केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कोच, डॉक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और पूरे सपोर्ट स्टाफ की मेहनत भी बराबर की होती है।