बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के संभावित इस्तीफे की चर्चाओं ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि राष्ट्रपति की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि वह अपना कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो वर्ष पहले ही पद छोड़ सकते हैं। इस घटनाक्रम ने देश की राजनीति को एक बार फिर नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
राष्ट्रपति शहाबुद्दीन जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए सत्ता परिवर्तन के बावजूद अपने संवैधानिक पद पर बने हुए हैं। इसी आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी और वह देश छोड़कर भारत चली गई थीं, जहां वह अब भी रह रही हैं। हाल के दिनों में राष्ट्रपति और शेख हसीना के बीच कथित संपर्क की खबरों ने राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है।
राष्ट्रपति के संभावित इस्तीफे की अटकलें उस समय और तेज हो गईं, जब संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने अपनी थाईलैंड यात्रा बीच में ही समाप्त कर निर्धारित समय से पहले ढाका लौटने का फैसला किया। पहले उनकी वापसी रविवार को तय थी, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम के बीच वह शुक्रवार को ही लौट आए। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति अपना इस्तीफा संसद अध्यक्ष को सौंपते हैं और नए राष्ट्रपति के निर्वाचन तक अध्यक्ष ही कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाते हैं।
मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि हाल ही में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन और शेख हसीना के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित इस्तीफे की वजह केवल यही बातचीत नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
इस बीच शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है। उनकी संभावित वापसी को लेकर सरकार ने कहा है कि उन्हें देश लौटने पर न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। ऐसे समय में यदि राष्ट्रपति पद पर बदलाव होता है तो इसका असर बांग्लादेश की सत्ता व्यवस्था और आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजर राष्ट्रपति के अगले कदम और राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।