संसद के मानसून सत्र के दौरान उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के नई दिल्ली स्थित आवास पर उत्तराखंड भाजपा के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। अनौपचारिक माहौल में हुई इस मुलाकात में चाय की चुस्कियों के साथ संसद के मानसून सत्र, उत्तराखंड के विकास, केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा संगठन की आगामी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका, उत्तराखंड के समग्र विकास, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय तथा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए।
डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने संसदीय और प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल संसद में जनता की आवाज उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से राष्ट्रहित, जनसेवा और संगठनात्मक मजबूती के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन कानून हाथ में लेना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सभी जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।
बैठक के अंत में सभी नेताओं ने उत्तराखंड के विकास, संगठन की मजबूती और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया तथा आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों को लेकर अपने सुझाव भी साझा किए।