भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह काफी अहम रहने वाला है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति इस सप्ताह निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। इन सभी कारकों के चलते बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस सप्ताह कई प्रमुख कंपनियां अपने अप्रैल-जून तिमाही परिणाम घोषित करेंगी। इनमें इन्फोसिस, वन97 कम्युनिकेशंस (पेटीएम), अल्ट्राटेक सीमेंट, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, बजाज ऑटो, डॉ. रेड्डीज लैब, इंडसइंड बैंक, नेस्ले इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों का असर संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की नजर दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति और खरीफ फसलों की बुवाई पर भी रहेगी। अच्छी बारिश और बेहतर बुवाई ग्रामीण मांग को मजबूती दे सकती है, जबकि इसका असर खाद्य महंगाई और भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच हालात सामान्य होने पर बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन यदि तनाव बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार में भी अस्थिरता बढ़ सकती है।
पिछले सप्ताह रिलायंस इंडस्ट्रीज के शुद्ध लाभ में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि कंपनी का परिचालन लाभ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। वहीं एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक ने मजबूत तिमाही नतीजे पेश किए, जिससे बाजार को कुछ समर्थन मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह निवेशकों को घरेलू आर्थिक संकेतकों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कंपनियों के वित्तीय परिणामों और वैश्विक घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही कारक बाजार की दिशा तय करेंगे।