सिलक्यारा टनल में पिछले बुधवार देर रात हुए हादसे, जिसमें एक मजदूर की जान चली गई थी, के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रशांत आर्य के निर्देश पर गठित तकनीकी समिति ने घटनास्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों और सुरक्षा प्रबंधों का बारीकी से आकलन किया।
समिति ने अपर जिलाधिकारी मुक्त मिश्रा के नेतृत्व में सबसे पहले स्यानाचट्टी क्षेत्र का दौरा किया। यहां गड़गड़ गाड़ में सिंचाई विभाग, पुरोला द्वारा कराए जा रहे चैनलाइजेशन और आपदा न्यूनीकरण कार्यों की तकनीकी समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति, जल निकासी व्यवस्था, नदी के प्रवाह, तट सुरक्षा उपायों और मानसून के दौरान संभावित जोखिमों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
विशेषज्ञों ने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ तय समय सीमा में पूरे किए जाएं। समिति ने कहा कि निरीक्षण के आधार पर विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर आवश्यक सुझावों के साथ उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
इसके बाद तकनीकी समिति ने सिलक्यारा टनल का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने टनल निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए कार्यदायी संस्था से अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति का सही आकलन किया जा सके।
समिति ने हाल ही में हुए हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी गहन जांच की। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए टनल में सुरक्षा के सभी आवश्यक और पुख्ता इंतजाम किए जाएं। श्रमिकों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि मानसून के दौरान जिले के सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, भू-विज्ञान एवं खनिज निदेशालय तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।