मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित होगा। महज पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर राज्य सरकार विधायी और वित्तीय कार्यों को पूरा करने की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी ओर विपक्ष ने भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, किसानों की समस्याओं, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है। ऐसे में सत्र के दौरान तीखी बहस और हंगामे की संभावना भी जताई जा रही है।
विधानसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार इस बार विधायकों ने कुल 1,642 प्रश्न लगाए हैं। इनमें 841 तारांकित और 801 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इतने बड़े संख्या में पूछे गए सवालों को लेकर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या पांच दिनों के सीमित सत्र में सरकार सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों का संतोषजनक जवाब दे पाएगी।
सत्र की तैयारियों के तहत विभिन्न विभागों ने अपने-अपने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रियों को समय पर तथ्यात्मक और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना होगी, ताकि सदन में पूछे गए सवालों का सटीक उत्तर दिया जा सके। सरकार की कोशिश है कि प्रश्नकाल के दौरान किसी भी तरह की जानकारी की कमी न रहे।
कार्यसूची के अनुसार 20 से 23 जुलाई तक प्रतिदिन प्रश्नकाल आयोजित होगा। इसके बाद शासकीय कार्यों पर चर्चा होगी और विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों एवं विषयों पर सदन में विचार-विमर्श किया जाएगा। इसी दौरान राज्य सरकार चालू वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी विधानसभा में पेश करेगी, जिस पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
वहीं, 24 जुलाई को सत्र के अंतिम दिन भी प्रश्नकाल के साथ अशासकीय संकल्पों पर चर्चा होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीमित अवधि वाले इस सत्र में विपक्ष सरकार को कई संवेदनशील मुद्दों पर कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और जवाबों के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का प्रयास करेगी। ऐसे में यह मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने वाला है।