भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कर्मचारियों की तैयारी इस रफ्तार का साथ नहीं दे पा रही है। काइंड्रिल (Kyndryl) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश की केवल 25 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि उनकी वर्कफोर्स एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष 2025 की तुलना में 12 प्रतिशत अंक कम है, जो बढ़ते कौशल अंतर की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 56 प्रतिशत कंपनियां अपने प्रमुख कारोबारी प्रक्रियाओं में एआई को पूरी तरह लागू कर चुकी हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 36 प्रतिशत था। इससे साफ है कि कंपनियां तेजी से एआई तकनीक अपना रही हैं, लेकिन कर्मचारियों को इसके अनुरूप प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया पीछे छूट रही है।
यह अध्ययन भारत समेत आठ देशों के 1,100 वरिष्ठ बिजनेस और टेक्नोलॉजी लीडर्स के सर्वेक्षण पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 81 प्रतिशत भारतीय कारोबारी नेताओं को चिंता है कि एआई का विकास कर्मचारियों के कौशल, गवर्नेंस सिस्टम और मौजूदा ऑपरेटिंग मॉडल से कहीं अधिक तेजी से हो रहा है। इससे भविष्य में कुशल मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 84 प्रतिशत भारतीय कंपनियों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में स्वायत्त एआई एजेंट महत्वपूर्ण कारोबारी फैसलों में अहम भूमिका निभाने लगेंगे। हालांकि, पूरी तरह बिना मानवीय निगरानी के काम करने वाले एआई सिस्टम पर केवल 28 प्रतिशत कंपनियां ही पूर्ण भरोसा जताती हैं।
एआई को अपनाने के लिए कंपनियां लगातार बदलाव भी कर रही हैं। करीब 69 प्रतिशत संगठनों ने कर्मचारियों की भूमिकाओं में परिवर्तन किया है, जबकि 33 प्रतिशत कंपनियों ने कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए अलग बजट और औपचारिक प्रशिक्षण योजनाएं शुरू की हैं।
काइंड्रिल इंडिया के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट लिंगराजू सावकर का कहना है कि भारत नई तकनीकों को तेजी से अपनाने वाले देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि एआई की वास्तविक सफलता केवल नई तकनीक अपनाने में नहीं, बल्कि कर्मचारियों को उसके अनुरूप प्रशिक्षित करने और मजबूत गवर्नेंस व्यवस्था विकसित करने में भी निहित है।