E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा खुलासा, क्या सच में खराब होता है इंजन? जानिए सच्चाई

पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाले E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे जुड़े अधिकांश दावे अफवाहों पर आधारित हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि E20 पेट्रोल का वैज्ञानिक स्तर पर व्यापक परीक्षण किया जा चुका है और कई देशों में इसका वर्षों से सफल उपयोग हो रहा है।

मंत्रालय ने उन दावों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, पानी की अत्यधिक बर्बादी होती है या वाहन का बीमा प्रभावित हो सकता है। सरकार के अनुसार, एक लीटर इथेनॉल के उत्पादन में केवल 3 से 5 लीटर पानी की आवश्यकता होती है और आधुनिक इथेनॉल संयंत्रों में इस पानी का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) भी किया जाता है। इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से अतिरिक्त चावल और मक्के से किया जा रहा है, जिनमें मक्के की हिस्सेदारी अब 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

इंजन की कार्यक्षमता को लेकर मंत्रालय ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के परीक्षणों का हवाला दिया। परीक्षण के दौरान कारों को 40 हजार किलोमीटर और दोपहिया वाहनों को 20 हजार किलोमीटर तक चलाया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि E20 पेट्रोल से इंजन के प्रदर्शन या माइलेज पर कोई उल्लेखनीय नकारात्मक असर नहीं पड़ा। बल्कि इथेनॉल की उच्च ऑक्टेन गुणवत्ता के कारण इंजन की कार्यक्षमता बेहतर देखी गई।

सरकार के मुताबिक, भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया है। इससे देश को करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिला है और लगभग 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।

हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बहुत पुराने वाहनों में कुछ रबर के पुर्जों को समय से पहले बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं, E20 पेट्रोल में चीनी या कीड़े होने जैसे वायरल दावों को पूरी तरह निराधार और फर्जी बताया गया है।

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