शहर की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र के राजीव गांधी वार्ड में बुधवार सुबह लोगों के घरों में नलों से काला, कीचड़युक्त और बदबूदार पानी आने से हड़कंप मच गया। दूषित पानी देखकर लोगों ने न केवल उसे पीने से इनकार कर दिया, बल्कि घरेलू उपयोग के लिए भी अनुपयुक्त बताया। घटना के बाद क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेयजल की मुख्य पाइपलाइन नाले के भीतर से गुजर रही है। उनका कहना है कि पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण नाले का गंदा पानी सीधे पेयजल आपूर्ति में मिल रहा है। रहवासियों विजय नायडू, पूरन लाल कोष्ठा, भास्कर पांडे सहित अन्य लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्षों से पाइपलाइन की उचित देखरेख नहीं होने का खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
लोगों के अनुसार, बुधवार को सप्लाई हुए पानी से तेज दुर्गंध आ रही थी। कई परिवारों ने अपनी पानी की टंकियां और वाटर फिल्टर बंद कर दिए हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरी में बाजार से पानी खरीदकर उपयोग कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों का दावा है कि दूषित पानी के कारण पेट दर्द, उल्टी और अन्य जलजनित बीमारियों की आशंका बढ़ गई है।
यह पहली बार नहीं है जब शहर में गंदे पानी की शिकायत सामने आई हो। इससे पहले भी कई इलाकों में ऐसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल अस्थायी समाधान किया गया। स्थायी व्यवस्था नहीं होने से समस्या बार-बार लौट रही है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम से तत्काल जांच कराने, पाइपलाइन की लीकेज ठीक करने और नाले के भीतर से गुजर रही जलापूर्ति लाइन को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।