पाकिस्तान में बढ़ती आंतरिक चुनौतियों और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में असंतोष के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का तुर्की दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में इस यात्रा को ऐसे समय की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जब पाकिस्तान क्षेत्रीय और घरेलू स्तर पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
तुर्की की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान से उच्चस्तरीय बैठक की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने तथा रक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठक में दोनों देशों ने एक-दूसरे के प्रमुख मुद्दों पर समर्थन जारी रखने की भी बात कही।
शहबाज शरीफ ने बैठक के बाद कहा कि पाकिस्तान और तुर्की के रिश्ते बेहद मजबूत और ऐतिहासिक हैं। उन्होंने दोनों देशों को “एक ही आत्मा के दो दिल” बताते हुए कहा कि कठिन समय में दोनों हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। वहीं, राष्ट्रपति एर्दोगान ने क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की।
बैठक के दौरान कश्मीर मुद्दे पर भी चर्चा हुई। शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान, तुर्की के लिए उत्तरी साइप्रस के मुद्दे पर अपने समर्थन को जारी रखेगा और उम्मीद करता है कि तुर्की भी जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि भारत जम्मू-कश्मीर को अपना आंतरिक और द्विपक्षीय विषय मानता है तथा किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का लगातार विरोध करता रहा है।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी दोहराया। इसके साथ ही रक्षा सहयोग, निवेश और तकनीकी साझेदारी को नई गति देने पर जोर दिया गया। शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर एर्दोगान को “बहुत प्रिय भाई” बताते हुए इस्तांबुल की यात्रा को सम्मान की बात कहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पाकिस्तान और तुर्की अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।