मिठाई छोड़ना ही काफी नहीं! जानिए डायबिटीज बढ़ाने वाली रोजमर्रा की 5 बड़ी गलतियां

 नई दिल्ली। आमतौर पर यह माना जाता है कि अधिक चीनी या मिठाइयों का सेवन करने से ही डायबिटीज होती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस धारणा को अधूरा बताते हैं। उनका कहना है कि विशेष रूप से टाइप-2 डायबिटीज केवल चीनी खाने का परिणाम नहीं है, बल्कि यह शरीर की चयापचय प्रणाली (मेटाबॉलिज्म) से जुड़ी एक जटिल बीमारी है, जिसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित आहार, लगातार मानसिक तनाव, अपर्याप्त नींद और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे कारक मिलकर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ाते हैं। आधुनिक जीवनशैली, घंटों बैठे रहने की आदत और फास्ट फूड के बढ़ते चलन ने भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा किया है।

डॉक्टरों का कहना है कि चीनी का सीमित सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है, लेकिन केवल मिठाइयों से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं है। डायबिटीज की रोकथाम और नियंत्रण के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना, पर्याप्त नींद लेना और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है, जो शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज पहुंचाकर ऊर्जा उपलब्ध कराता है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है और समय के साथ इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है।

अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ, मीठे पेय, मैदा से बने उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, केक और पेस्ट्री जैसे खाद्य पदार्थ मोटापा बढ़ाने में योगदान देते हैं, जो डायबिटीज का प्रमुख जोखिम कारक है। इसके अलावा, लगातार तनाव और कम नींद भी हार्मोनल असंतुलन पैदा कर ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञ प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम और 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेने की सलाह देते हैं, जिससे डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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