इंग्लैंड के ऐतिहासिक शेरवुड वन में खड़ा करीब 1,200 वर्ष पुराना प्रसिद्ध ‘मेजर ओक’ पेड़ अब जीवित नहीं रहा। सदियों से ब्रिटिश इतिहास, लोककथाओं और प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक माना जाने वाला यह विशाल वृक्ष रॉबिन हुड की कहानियों से जुड़ा रहा है। मान्यता है कि लोकनायक रॉबिन हुड और उसके साथी कभी इसी पेड़ की विशाल शाखाओं के नीचे शरण लिया करते थे।
पक्षी संरक्षण संस्था रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स (आरएसपीबी) ने पुष्टि की है कि इस वर्ष वसंत ऋतु के दौरान मेजर ओक पर नई पत्तियां नहीं फूटीं। विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद इसे मृत घोषित कर दिया गया। हालांकि यह ऐतिहासिक पेड़ अपनी जगह पर बना रहेगा और आने वाले वर्षों में भी शेरवुड वन की पहचान के रूप में दिखाई देता रहेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले दो सौ वर्षों में लाखों पर्यटक इस पेड़ को देखने पहुंचे। लगातार बढ़ती पर्यटक गतिविधियों के कारण इसके आसपास की मिट्टी अत्यधिक सख्त हो गई, जिससे बारिश का पानी जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाया। नमी और पोषण की कमी से जड़ें कमजोर होती चली गईं और वृक्ष धीरे-धीरे क्षीण होता गया।
पर्यावरणविदों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन ने भी इसकी स्थिति को और गंभीर बना दिया। हाल के वर्षों में ब्रिटेन में बढ़ती गर्मी, बार-बार आने वाली हीटवेव और सूखे जैसी परिस्थितियों ने प्राचीन वृक्षों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। उम्रदराज पेड़ मौसम में होने वाले तीव्र बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और मेजर ओक भी इससे अछूता नहीं रहा।
इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए वर्षों तक प्रयास किए गए। इसकी विशाल शाखाओं को सहारा देने के लिए लोहे के खंभे और केबल लगाए गए थे। 1970 के दशक में इसके चारों ओर सुरक्षा घेरा भी बनाया गया था, ताकि लोग बहुत करीब न पहुंच सकें। बावजूद इसके, प्राकृतिक चुनौतियों और मानवीय दबावों के संयुक्त प्रभाव ने अंततः इस ऐतिहासिक वृक्ष का जीवन समाप्त कर दिया। हालांकि इसकी लकड़ी और संरचना अब भी वन के पारिस्थितिकी तंत्र में अनेक जीवों के लिए आश्रय और भोजन का स्रोत बनी रहेगी।