मुंबई। घरेलू शेयर बाजार पिछले सप्ताह की गिरावट से उबरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में आने वाला कारोबारी सप्ताह निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक घटनाक्रमों के साथ-साथ कई घरेलू आर्थिक संकेतकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह निवेशकों की सबसे अधिक नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर रहेगी। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के क्रियान्वयन और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक गतिविधियों की स्थिति पर बाजार बारीकी से निगरानी रखेगा। यदि यह समुद्री मार्ग सामान्य रूप से संचालित होता है, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर रह सकती है, जिससे ऊर्जा बाजार में राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
घरेलू मोर्चे पर मानसून की प्रगति निवेशकों के लिए एक प्रमुख कारक बनी रहेगी। भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में बेहतर मानसून का सीधा असर ग्रामीण मांग, उपभोग और कंपनियों की आय पर पड़ता है। इसके अलावा देश के आठ प्रमुख कोर सेक्टरों से जुड़े उत्पादन आंकड़े भी जारी किए जाएंगे, जिनसे अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मई माह के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े और भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के मिनट्स भी निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य में ब्याज दरों को लेकर संभावित रुख का अनुमान लगाया जाएगा।
इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। जानकारों का मानना है कि इन सभी घरेलू और वैश्विक कारकों के संयुक्त प्रभाव से आगामी सप्ताह में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।