ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक पहल सामने आई है। खबर है कि अमेरिका, कतर के साथ मिलकर ईरान की छह अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति को मानवीय जरूरतों के लिए जारी करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। इस कदम को दोनों देशों के बीच व्यापक समझौते की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कतर में रोकी गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग भोजन, दवाइयों और अन्य मानवीय आवश्यकताओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह पहल ईरान को भविष्य में परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम समझौते के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार, इस योजना को केवल मानवीय सहायता तक सीमित रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि फंड का इस्तेमाल किसी सैन्य या विवादास्पद गतिविधि में न हो। साथ ही, यह व्यवस्था भविष्य में ईरान की अन्य जब्त संपत्तियों पर संभावित रियायतों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
हालांकि, ईरान ने अब तक इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और न ही इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि तेहरान इस पहल को किस रूप में देखता है।
इस बीच, 14 जून को ईरान और अमेरिका ने पुष्टि की थी कि एक समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार कर लिया गया है। 18 जून की रात दोनों पक्षों ने दूरस्थ तरीके से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इस ज्ञापन में 28 फरवरी से जारी सैन्य तनाव को समाप्त करने की रूपरेखा तय की गई है। इसके तहत दोनों देशों को ईरानी परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की समय-सीमा दी गई है। साथ ही, अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी में ढील और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात बहाल करने जैसे मुद्दों को भी इसमें शामिल किया गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या छह अरब डॉलर का यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते की राह आसान कर पाएगा।