ढाका। बांग्लादेश के गैबांधा जिले में निर्माणाधीन 82 फीट ऊंची राम प्रतिमा परियोजना को फिलहाल रोक दिया गया है। यह प्रतिमा श्री राधा गोबिंद और काली मंदिर परिसर में बनाई जा रही थी और इसे एशिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा के रूप में विकसित करने की योजना थी। हालांकि मंदिर प्रबंधन ने निर्माण कार्य पर लगी रोक को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उठाया गया अस्थायी कदम बताया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके पीछे बढ़ते विरोध और दबाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इस परियोजना का विरोध करते हुए न केवल निर्माण कार्य रोकने की मांग की है, बल्कि अधूरी संरचना को हटाने की भी मांग उठाई है। विरोध कर रहे समूहों का कहना है कि परियोजना की फंडिंग और इसके उद्देश्यों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2025 की शुरुआत में निजी आर्थिक सहयोग से इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। मंदिर परिसर में पहले से ही 100 से अधिक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। इनमें लगभग 30 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा और 53 फीट ऊंची भगवान कृष्ण की प्रतिमा भी शामिल हैं। प्रस्तावित राम प्रतिमा पर करीब 17 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान था।
विरोधी संगठनों ने परियोजना के वित्तीय स्रोतों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस निर्माण के लिए प्राप्त धनराशि की जांच की जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी बाहरी संस्था या विदेशी स्रोत से वित्तीय सहायता तो नहीं मिली है। इसके साथ ही परियोजना से जुड़े लोगों के बैंक खातों और संपत्तियों की जांच की मांग भी की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान धार्मिक स्थलों और मूर्तियों से जुड़ी कई परियोजनाएं विवादों में रही हैं। इससे पहले भी कुछ धार्मिक निर्माण कार्यों को विरोध के कारण रोकना पड़ा था।
फिलहाल मंदिर समिति ने स्थिति सामान्य होने तक निर्माण कार्य स्थगित रखने का निर्णय लिया है। इस मामले ने बांग्लादेश में धार्मिक स्थलों, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सौहार्द को लेकर नई बहस छेड़ दी है।