देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति, अनुशासन और सैन्य गौरव का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में कैडेट्स उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने कैडेट्स के उत्कृष्ट प्रदर्शन, अनुशासन और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता की सबसे मजबूत आधारशिला है। आईएमए जैसे प्रतिष्ठित संस्थान देश को ऐसे युवा सैन्य अधिकारी प्रदान करते हैं, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
इस अवसर पर सैन्य परंपराओं और गौरवशाली विरासत का भव्य प्रदर्शन किया गया। कैडेट्स ने अपने अनुशासित मार्च, उत्कृष्ट प्रशिक्षण और सैन्य कौशल का प्रदर्शन कर उपस्थित अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कैडेट्स का उत्साहवर्धन किया और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड का सेना से विशेष संबंध रहा है और राज्य के युवाओं ने हमेशा देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आईएमए न केवल सैन्य नेतृत्व तैयार करने का केंद्र है, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन की प्रेरणा भी देता है।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने भी कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्हें समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को जीवनभर अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों के कंधों पर है।
कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और सैन्य गौरव का माहौल देखने को मिला। राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और सेना के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी ने इस अवसर को और अधिक गरिमामय बना दिया। यह आयोजन भारतीय सैन्य अकादमी की उत्कृष्ट परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को एक बार फिर रेखांकित करता है।